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Monday, May 31, 2010

ॐ साईं राम स्तुति

ॐ साईं राम

हाथ जोड कर शीश झुका कर
साई तेरे दर पर आकर
बाबा करते हम अरदास
रखना श्री चरणो के पास

मागे हम आ हाथ पसारे
जो हम चाहे देना प्यारे
धन दौलत की नही है आस
न ही राज योग की प्यास

नहीं चाहिये महल चौबारे
नहीं चाहिये वैभव सारे
नहीं चाहिये यश और मान
ना देना कोई सम्मान

जो हम चाहें सुन लो दाता
देना होगा तुम्हें विधाता
खाली हम ना जायेंगे
जो मान्गा सो पायेंगे

हमको प्रभु प्रेम दो ऐसा
शामा को देते थे जैसा
हरदम रखो अपने साथ
मस्तक पर धर कर श्री हाथ

भक्ति हममे जगाओ वैसी
जगाई मेधा मे थी जैसी
भक्ति मे भूलें जग सारा
केवल तेरा रहे सहारा

महादान हमको दो ऐसा
लक्श्मी शिन्दे को दिया था जैसा
अष्टांग योग नवधा भक्ति
साई सब है तेरी शक्ति

सेवा का अवसर दो ऐसा
भागो जी को दिया था जैसा
चाहे कष्ट अनेक सहें
श्री चरणों का ध्यान रहे

निकटता दे दो हमको वैसी
म्हाल्सापति को दी थी जैसी
प्रभु बना लो अपना दास
ह्रदय में आ करो निवास

सम्वाद करो हमसे प्रभु ऐसे
तात्या से करते थे जैसे
सुख दुख तुमसे बांट सकें
रिश्ता तुम से गान्ठ सके

महाग्यान दो हमको ऐसा
नाना साहेब को दिया था जैसा
दूर अझान अन्धेरा हो
जीवन में नया सवेरा हो

वाणी दे दो हमको वैसी
दासगणु को दी थी जैसी
घर घर तेरा गान करें
साई तेरा ध्यान धरें

आशिष दे दो हमको ऐसा
हेमाडपंत को दिया था जैसा
कुछ हम भी तो कर जाऎं
साईं स्तुति रच तर जाऎं

महाप्रसाद हमको दो ऐसा
देते राधा माई को जैसा
हम भी पाऎं कॄपा प्रसाद
शेष रहे ना कोई स्वाद

आधि व्याधि हर लो ऐसे
काका जी की हरी थी जैसे
शेष रहे ना कोई विकार
दुर्गुण , दुर्मन दुर्विचार

मुक्ति देना हमको वैसी
बालाराम को दी थी जैसी
श्री चरणों में डालें डेरा
जन्म मरण का छूटे फेरा

जो मांगा है नहीं असंभव
तुम चाहो तो कर दो संभव
विनती ना ठुकराओ तुम
बच्चों को अपनाओ तुम

माना दोष घनेरे हैं
बाबा फिर भी तेरे हैं
दो हमको मनचाहा दान
भक्तों का कर दो कल्याण