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Wednesday, July 21, 2010

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All paths lead to Almighty (Para Brahma) when worshiped sincerely. 
Hindu (Sanathan Dharma) religion has numerous Gods and Goddesses. In their praise various Stotra (hymns of praise), Stuti (in memory of), Chalisa (40 verses composed in praise) and Artii (sung with light and lamps) have been written.
I have created simple English rhymes of the above to help people comprehend them.

On YOUTUBE Bhajans (Songs): Krishna

DAY                  COLOUR                   DEITY 
Monday             White                       Shivji;  Ganeshji

Tuesday              Red                        Hanumanji - Gatha; Kali

Wednesday         Green                     Vithal; Krishna incarnation

Thursday             Yellow                    Vishnu & incarnations  Saraswati Ma

Friday                  Blue                       Ma - Laxmiji; Santoshi; Durgaji 

Saturday              Black                      Shaniji

Sunday                Orange                   Surya;  Ram
 
The deity worshiped on a particular day varies from region to region and community to community. Result of all upvaas or fast depends on the person. It is best, if all family members undertake Vrata together. All rituals and observances are path towards understanding the Supreme and automatically alleviate sufferings. Worship Brahma always, Ishta Dev daily & Kula Dev (at place of origin) annually. 

Monday, May 31, 2010

गायत्री स्तोत्र

सुकल्याणीं वाणीं सुरमुनिवरैः पूजितपदाम
शिवाम आद्यां वंद्याम त्रिभुवन मयीं वेदजननीं
परां शक्तिं स्रष्टुं विविध विध रूपां गुण मयीं
भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजननीम

विशुद्धां सत्त्वस्थाम अखिल दुरवस्थादिहरणीम्
निराकारां सारां सुविमल तपो मुर्तिं अतुलां
जगत् ज्येष्ठां श्रेष्ठां सुर असुर पूज्यां श्रुतिनुतां
भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजननीम

तपो निष्ठां अभिष्टां स्वजनमन संताप शमनीम
दयामूर्तिं स्फूर्तिं यतितति प्रसादैक सुलभां
वरेण्यां पुण्यां तां निखिल भवबन्धाप हरणीं
भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजननीम

सदा आराध्यां साध्यां सुमति मति विस्तारकरणीं
विशोकां आलोकां ह्रदयगत मोहान्धहरणीं
परां दिव्यां भव्यां अगम भव सिन्ध्वेक तरणीं
भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजननीम

अजां द्वैतां त्रेतां विविध गुणरूपां सुविमलां
तमो हन्त्रीं तन्त्रीं श्रुति मधुरनादां रसमयीं
महामान्यां धन्यां सततकरूणाशील विभवां
भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजननीम

जगत् धात्रीं पात्रीं सकल भव संहारकरणीं
सुवीरां धीरां तां सुविमलतपो राशि सरणीं
अनैकां ऐकां वै त्रयजगत् अधिष्ठान् पदवीं
भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजननीम

प्रबुद्धां बुद्धां तां स्वजनयति जाड्यापहरणीं
हिरण्यां गुण्यां तां सुकविजन गीतां सुनिपुणीं
सुविद्यां निरवद्याममल गुणगाथां भगवतीं
भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजननीम

अनन्तां शान्तां यां भजति वुध वृन्दः श्रुतिमयीम
सुगेयां ध्येयां यां स्मरति ह्रदि नित्यं सुरपतिः
सदा भक्त्या शक्त्या प्रणतमतिभिः प्रितिवशगां
भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजननीम

गायत्री स्तुति

ऊँ स्तुता मया वरदा वेदमाता,
प्रचोदयन्तां पावमानी द्घिजानाम् ।
आयुः प्राणं प्रजां पशुं,
कीर्ति द्रविणं ब्रहृवर्चसम् ।
महृं दत्वा ब्रजत ब्रहृलोकम् ।

Sunday, May 30, 2010

श्री गायत्री माँ की आरती

ॐ जय गायत्री माता, स्वामी जय जगदम्बे माता |
तुम को निश दिन ध्यावत, हरि हर औ धाता ||
ॐ जय गायत्री माता ...

आदि शक्ति तुम जननी, जग पालन करनी |
दुःख शोक भय नाशनी, क्लेश कलह हत्री ||
ॐ जय गायत्री माता ...

तुम गंगा, तुम गीता, तुम ही सावित्री |
सविता शक्ति स्वरुपा माता गायत्री
ॐ जय गायत्री माता ...

स्वाहा स्वधा तुम हो तुम ही रुद्रानी
तुम विद्या तुम वाणी कमला कल्याणी
ॐ जय गायत्री माता ...

शुद्ध बुध्धि की दाता तुम तन की माता
तुष्टि दुष्टि तुम हो माँ क्रिद्धि श्रिद्धि दाता
ॐ जय गायत्री माता ...

तुम राधा तुम सीता तुम हो इन्द्राणी
परमा प्रकृति तुम ही हो माता ब्रम्हाणी
ॐ जय गायत्री माता ...